देश में अक्सर यह चर्चा सुनने में आती है कि ड्राइविंग लाइसेंस बड़ी आसानी से मिल जाते हैं और कई बार इस वजह से सड़क पर दुर्घटनाएँ हो जाती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार अब इस दिशा में गंभीर कदम उठाने जा रही है ताकि केवल वही लोग लाइसेंस प्राप्त करें जो सुरक्षित और कुशल ड्राइविंग कर सकते हैं। इसके लिए राज्य में प्रत्यायन (प्रमाणन) प्राप्त चालन प्रशिक्षण केंद्र (एडीटीसी) खोले जाने जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने इस योजना के तहत बताया कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल कुशल चालकों को स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य यह है कि सड़क पर दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आए और वाहन चालकों के प्रशिक्षण में वैज्ञानिक और व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाया जाए।
केंद्रीय मोटरयान नियमावली में संशोधन
इस योजना के क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय मोटरयान नियमावली, 1989 में संशोधन किए गए हैं। नए प्राविधान के अनुसार, चालन प्रशिक्षण अब अधिक पारदर्शी, प्रमाणिक और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाएगा। इसके तहत एडीटीसी का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रशिक्षण देना है, ताकि वे सड़क पर सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से वाहन चला सकें।
परिवहन मंत्री ने कहा कि 10 लाख की आबादी पर एक प्रत्यायन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा। इस पहल के तहत लगभग 21 जिलों में प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन पहले ही विभाग द्वारा किया जा रहा है। इन केंद्रों में प्रशिक्षकों और प्रशिक्षण उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।

आवेदन प्रक्रिया
प्रतयायन चालन प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना और रख–रखाव के लिए पारदर्शिता पूर्ण पर्यवेक्षण किया जाएगा। इसके लिए सभी इच्छुक संस्थान और केंद्र नए विकसित किए जा रहे ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 को अपराह्न 12 बजे से शुरू होगी।
इच्छुक और अर्ह आवेदक अब उत्तर प्रदेश के प्रत्यायन (प्रमाणन) चालन प्रशिक्षण केंद्र (एडीटीसी) में अपनी योग्यता और अन्य शर्तों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए विशेष रूप से विकसित पोर्टल http://uptransport.upsdc.gov.in पर आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पूर्व में इन केंद्रों के लिए आवेदन ऑफलाइन माध्यम से किए जाते थे, लेकिन अब राज्य सरकार ने इसे डिजिटल रूप में लाकर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आसान बना दिया है।
ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदक अपने दस्तावेज और आवश्यक जानकारी अपलोड कर सकते हैं। इसके अलावा, प्रत्येक जिले (जनपद) में प्रत्यायन चालन प्रशिक्षण केंद्रों की रिक्तियों की संख्या भी पोर्टल पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाएगी। इससे आवेदकों को अपने जिले में उपलब्ध केंद्रों की जानकारी और आवेदन की स्थिति का तुरंत पता चल सकेगा।
प्रशिक्षण का महत्व
सरकार का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं के पीछे अक्सर चालक की असावधानी और प्रशिक्षण की कमी होती है। एडीटीसी के माध्यम से प्रशिक्षुओं को न केवल वाहन चलाने की तकनीक सिखाई जाएगी, बल्कि सड़क नियमों, ट्रैफिक संकेतों और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के उपाय भी सिखाए जाएंगे।
इस तरह के प्रशिक्षण से यह सुनिश्चित होगा कि लाइसेंस प्राप्त करने वाला व्यक्ति सड़क पर जिम्मेदारी और सतर्कता से वाहन चलाए। इसके अतिरिक्त, यह योजना सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करेगी।
सरकार की मंशा और लक्ष्य
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि राज्य सरकार की मंशा है कि सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इस योजना के तहत केवल “omife” यानी प्रमाणित और प्रशिक्षित चालक ही स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे।
सरकार का यह भी लक्ष्य है कि प्रशिक्षण केंद्र पूरे राज्य में समान रूप से स्थापित किए जाएं ताकि सभी जिले और नागरिक इसका लाभ उठा सकें। यह प्रणाली पारदर्शी और प्रभावी होगी, जिससे किसी भी प्रकार की धांधली या अनियमितता की संभावना समाप्त हो जाएगी।

भविष्य की योजना
योजना के तहत, प्रशिक्षण केंद्रों में समय–समय पर नई तकनीक और प्रशिक्षण उपकरणों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही प्रशिक्षकों के लिए विशेष कार्यशालाएँ आयोजित की जाएंगी ताकि वे आधुनिक प्रशिक्षण विधियों और सड़क सुरक्षा उपायों से अपडेट रह सकें।
सरकार का मानना है कि यदि चालक को प्रारंभिक स्तर से ही वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जाए तो सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इसके अलावा, यह योजना युवाओं में ड्राइविंग के प्रति गंभीरता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करेगी।
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