अमेरिका–इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते देश में LPG की स्थिति गंभीर हो गई है। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में पिछले 15 दिनों से रसोई गैस के लिए लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे आम नागरिकों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में LPG पर निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एथेनॉल स्टोव (Ethanol Stove) के ब्लू प्रिंट तैयार करने की दिशा में काम तेज कर दिया है।

LPG इक्विपमेंट रिसर्च सेंटर और देशभर की कई IIT इस स्टोव को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने 24 मार्च को दिल्ली में मीडिया को बताया कि ये स्टोव LPG और केरोसिन के विकल्प के रूप में काम करेंगे और घरेलू रसोई में ईंधन की किल्लत को कम करने में मदद करेंगे।
एथेनॉल स्टोव क्या होता है?
एथेनॉल स्टोव वह रसोई गैस स्टोव है जो केरोसिन या LPG के बजाय एथेनॉल नामक अल्कोहल–आधारित ईंधन पर चलता है। बायोएथेनॉल गन्ना, मक्का, गेहूं, चावल और स्टार्च वाली अन्य फसलों को फर्मेंट करके तैयार किया जाता है। यह पारंपरिक स्टोव की तुलना में सुरक्षित, तेज और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है। एथेनॉल स्टोव में बर्नर के नीचे सोख्तानुमा फाइबर लगी होती है, जो ईंधन को धीरे–धीरे जलने देती है, जिससे खाना जल्दी पकता है और धुआं कम निकलता है।
सरकार का उद्देश्य सिर्फ LPG पर निर्भरता कम करना ही नहीं है, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खाना पकाने के लिए सुरक्षित, किफायती और स्वच्छ विकल्प उपलब्ध कराना भी है। फिलहाल स्टोव का परीक्षण और फाइनल टच देशभर के रिसर्च संस्थानों में दिया जा रहा है, ताकि इसे जल्द ही बाजार में लाया जा सके।
एथेनॉल स्टोव: LPG का अच्चा विकल्प?

कुछ परिस्थितियों में एथेनॉल स्टोव घरेलू रसोई में LPG का विकल्प के रूप में काम कर सकते हैं, लेकिन निकट भविष्य में यह पूरी तरह से LPG को बदलने में सक्षम नहीं हैं। फिलहाल, एथेनॉल का एक बड़ा हिस्सा पेट्रोल में मिलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिससे खाना पकाने के लिए सस्ते और पर्याप्त एथेनॉल की उपलब्धता सीमित रहती है। इसके अलावा, एथेनॉल की आपूर्ति पर आधारित कीमतें LPG और केरोसिन की तुलना में अधिक हो सकती हैं, खासकर शहरी क्षेत्रों में। वहीं, शहरों में LPG का वितरण नेटवर्क पहले से ही मजबूत और भरोसेमंद है, जिससे घरेलू उपयोग के लिए इसकी पहुँच आसान है। इसलिए, एथेनॉल स्टोव फिलहाल एक विकल्प के तौर पर काम कर सकते हैं, लेकिन LPG की पूरी जगह नहीं ले सकते।
बाजार में उपलब्धता
एथेनॉल स्टोव जल्द ही बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं। देश के कुछ राज्यों में नीति आयोग और अमेरिकी NGO ‘गाइया’ ने मिलकर ग्रामीण इलाकों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत स्टोव उपलब्ध कराए हैं।
असम सरकार ने 2018 में स्वीडन से मेथेनॉल स्टोव खरीदकर प्रयोग किया। ओडिशा और महाराष्ट्र में भी ग्रामीण क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट चल चुके हैं। केंद्र सरकार पेट्रोल पंप पर एथेनॉल एटीएम लगाने पर विचार कर रही है, ताकि वाहन और रसोई दोनों के लिए ईंधन उपलब्ध कराया जा सके।
एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में ब्रोकन राइस की हिस्सेदारी घटाने पर विचार कर रही है। वर्तमान में PDS में ब्रोकन राइस का हिस्सा 25% है, जिसे घटाकर 10% किया जा सकता है। इस बदलाव से हर साल लगभग 90 लाख टन ब्रोकन राइस एथेनॉल उत्पादन के लिए उपलब्ध होगा।
इस पहल से न केवल घरेलू LPG पर निर्भरता कम होगी, बल्कि किसानों को नई फसल आधारित अर्थव्यवस्था का लाभ भी मिलेगा।
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