प्रदेश के गांवों में हो रहे प्रदूषण का अब सिर्फ अनुमान नहीं, बल्कि सटीक आंकड़ा नई जनगणना से सामने आएगा। इससे हर गांव की हकीकत उजागर होगी—यह पता चलेगा कि किसके घर में कितने वाहन हैं, कौन लकड़ी या कोयले से खाना बना रहा है और कहां कितनी ऊर्जा खपत हो रही है। इससे पहले सरकार 2011 की जनगणना के पुराने आंकड़ों के आधार पर ही योजनाएं बना रही थी, जबकि बीते 15 साल में गांवों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

संसाधनों और वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है, जिससे प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ा है। नई जनगणना के आंकड़ों से यह तय करना आसान होगा कि किन गांवों में प्रदूषण ज्यादा है और वहां किस प्रकार के कदम उठाने होंगे। इसके आधार पर सरकार कार्बन न्यूट्रल गांवों की दिशा में लक्षित और ठोस रणनीति तैयार कर सकेगी।
गांवों में प्रदूषण का सटीक आंकड़ा नई जनगणना से सामने
प्रदेश के गांवों में हो रहे प्रदूषण का अब सिर्फ अनुमान नहीं, बल्कि सटीक आंकड़ा नई जनगणना से सामने आएगा। यह सर्वे हर गांव की असली तस्वीर उजागर करेगा—कितने वाहन घरों में हैं, कौन लकड़ी या कोयले से खाना बना रहा है, और ऊर्जा की खपत कितनी है। पहले तक सरकार 2011 की पुरानी जनगणना के आंकड़ों पर योजनाएं बना रही थी, लेकिन बीते 15 साल में गांवों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। संसाधनों और वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ गई है, जिससे प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ा है और अब इसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया है।
नई जनगणना के आंकड़ों से यह स्पष्ट होगा कि कौन से गांवों में प्रदूषण अधिक है और किन क्षेत्रों में विशेष कदम उठाने की जरूरत है। इससे सरकार को कार्बन न्यूट्रल गांवों की दिशा में ठोस, लक्षित और प्रभावी रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। हर गांव का विस्तृत डाटा मिलने से नीति निर्माण और प्रदूषण नियंत्रण दोनों ही तेजी से संभव होंगे, जिससे 2030 तक प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य को हासिल करना आसान होगा।

सवाल खोलेंगे प्रदूषण का सच
नई जनगणना में हर परिवार से करीब 33 सवाल पूछे जाएंगे, जो गांवों में हो रहे प्रदूषण और संसाधन उपयोग की पूरी तस्वीर उजागर करेंगे। इन सवालों में घर में मौजूद साइकिल, स्कूटर, कार और अन्य वाहनों की संख्या, बिजली कनेक्शन, खाना पकाने के ईंधन जैसे एलपीजी, लकड़ी या कोयला, और पेयजल स्रोत की जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा सौर ऊर्जा उपकरण, जेनरेटर, इंजन और ई–वाहनों का भी ब्योरा लिया जाएगा। इन विस्तृत आंकड़ों के आधार पर हर गांव के कार्बन उत्सर्जन का सही अनुमान लगाया जा सकेगा और उसी अनुसार प्रदूषण कम करने के लिए लक्षित और प्रभावी योजनाएं तैयार की जाएंगी।
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