सावन का पावन महीना चल रहा है। हर तरफ भोलेनाथ के जयकारे गूंज रहे हैं। शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भक्ति के साथ-साथ पूजा की सही विधि का भी उतना ही महत्व है? कई बार श्रद्धालु अनजाने में ऐसी चीजें शिवलिंग पर अर्पित कर देते हैं, जिन्हें शास्त्रों में वर्जित बताया गया है। ऐसे में आज की इस खास रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि शिवलिंग पर क्या चढ़ाना शुभ माना जाता है और किन चीजों को भूलकर भी अर्पित नहीं करना चाहिए। इसलिए इस लेख को आखिर तक जरूर पढ़े।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने पर वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यही वजह है कि लाखों श्रद्धालु जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और अन्य पूजन सामग्री से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। लेकिन शास्त्रों में कुछ ऐसी वस्तुओं का भी उल्लेख मिलता है, जिन्हें शिवलिंग पर अर्पित करना उचित नहीं माना गया है।
सबसे पहले बात करते हैं उन चीजों की, जिन्हें शिवलिंग पर चढ़ाना शुभ माना जाता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव को केवल एक लोटा शुद्ध जल भी अर्पित कर दिया जाए, तो वे प्रसन्न हो जाते हैं। इसके अलावा गंगाजल से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है। गंगाजल भगवान शिव को शीतलता प्रदान करता है और भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बनी रहती है।
कच्चे दूध से अभिषेक करने की भी परंपरा है। दूध के साथ दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर पंचामृत से अभिषेक करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर गन्ने के रस से भी शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।
भगवान शिव को बेलपत्र सबसे अधिक प्रिय माना गया है। मान्यता है कि तीन पत्तियों वाला ताजा और साबुत बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, आक का फूल, चंदन और सफेद रंग के पुष्प भी भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं। मौसमी फल और स्वच्छ मन से की गई पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।
अब बात करते हैं उन वस्तुओं की, जिन्हें शिवलिंग पर चढ़ाना शास्त्रों में वर्जित माना गया है।
सबसे पहले आता है तुलसी का पत्ता। तुलसी हिंदू धर्म में बेहद पवित्र मानी जाती है और भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। लेकिन शिव पूजा में तुलसी का प्रयोग नहीं किया जाता। पौराणिक कथाओं के अनुसार तुलसी और भगवान शिव से जुड़ी मान्यताओं के कारण शिवलिंग पर तुलसी अर्पित करना उचित नहीं माना जाता।
दूसरी वस्तु है हल्दी। हल्दी को सौभाग्य और मांगलिक कार्यों का प्रतीक माना जाता है। चूंकि भगवान शिव वैराग्य और तपस्या के प्रतीक हैं, इसलिए शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाने की परंपरा नहीं है।
केतकी का फूल भी भगवान शिव को अर्पित नहीं किया जाता। शिवपुराण के अनुसार, एक पौराणिक कथा में केतकी के झूठ बोलने के कारण भगवान शिव ने उसे अपनी पूजा में स्वीकार न करने का वर दिया था। इसी वजह से आज भी शिव पूजा में केतकी का फूल वर्जित माना जाता है।
इसी तरह नारियल का पानी भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता। हालांकि नारियल पूजा में शुभ माना जाता है, लेकिन उसका जल शिवलिंग पर अर्पित करने की परंपरा नहीं है।
शिवलिंग पर सिंदूर और कुमकुम भी नहीं चढ़ाना चाहिए। ये सुहाग और मांगलिक जीवन के प्रतीक हैं, जबकि भगवान शिव वैराग्य के स्वरूप माने जाते हैं। इसलिए इनका प्रयोग शिवलिंग पर नहीं किया जाता।
इसके अलावा शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि शंख से जल अर्पित नहीं करना चाहिए। समुद्र मंथन से प्राप्त शंख भगवान विष्णु से जुड़ा माना जाता है, इसलिए शिवलिंग पर सीधे शंख से जल चढ़ाने से बचना चाहिए।
चमेली और लाल रंग के फूल भी सामान्यतः देवी पूजा में अधिक उपयोग किए जाते हैं। वहीं शिव पूजा में सफेद फूलों को अधिक शुभ माना गया है। साथ ही कटे-फटे या खंडित बेलपत्र भी भगवान शिव को अर्पित नहीं करने चाहिए। हमेशा ताजे, साफ और साबुत बेलपत्र ही चढ़ाने चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा, पवित्रता और सही विधि। यदि भक्त पूरे मन, विश्वास और नियमों के साथ भगवान शिव की आराधना करता है, तो भोलेनाथ अवश्य प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।
अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो वीडियो को लाइक करें, अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर करें और ऐसे ही धार्मिक व उपयोगी वीडियो देखने के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें। हर हर महादेव!
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, शास्त्रों, पुराणों और प्रचलित परंपराओं पर आधारित जानकारी प्रस्तुत करता है। विभिन्न संप्रदायों, क्षेत्रों और परंपराओं में पूजा-विधि एवं मान्यताओं में भिन्नता हो सकती है। हमारा उद्देश्य किसी भी धार्मिक भावना को आहत करना नहीं, बल्कि सामान्य धार्मिक जानकारी साझा करना है। किसी विशेष पूजा-विधि के लिए अपने गुरु, पुरोहित या स्थानीय धार्मिक परंपरा का मार्गदर्शन अवश्य लें।
also read : sawankevratmeinkyakyakhanachahi
