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UP News: योगी सरकार की नई पहल: बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को मिलेगा इस बात की गारंटी

उत्तर प्रदेश सरकार ने बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं के बेहतर पोषण के लिए एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल में अप्रैल 2026 से प्रदेश के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार योजना लागू की जाएगी। यह योजना उत्तर प्रदेश को देश का पहला राज्य बना देगी, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत इस तरह का अभिनव पोषण मॉडल पेश कर रहा है।

योजना के तहत पोषण वितरण में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) का उपयोग किया जाएगा। इसका मतलब है कि लाभार्थियों को केवल उस प्रणाली के माध्यम से ही पुष्टाहार मिलेगा और ऑफलाइन वितरण को मान्यता नहीं दी जाएगी। यह तकनीक भ्रष्टाचार और वितरण में गड़बड़ी की संभावनाओं को कम करेगी।

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पौष्टिक भोजन का वर्गीकरण

इस नई व्यवस्था के तहत विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों और महिलाओं के लिए अलगअलग पोषणयुक्त रेसिपी तैयार की गई हैं। योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • छह माह से एक वर्ष तक के बच्चे: आटाबेसन का मीठा हलवा।
  • एक से तीन वर्ष तक के बच्चे: आटाबेसन का मीठा हलवा।
  • तीन से छह वर्ष तक के बच्चे: आटाबेसन बर्फी (मीठा) और दलियामूंगसोया खिचड़ी (नमकीन)
  • गर्भवती और धात्री महिलाएं: आटाबेसनसोया बर्फी और दलियामूंगदाल खिचड़ी।

इसके अलावा, अतिकुपोषित बच्चों के लिए विशेष पोषण आहार की व्यवस्था भी की गई है। 06 माह से 01 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा, 01 वर्ष से 03 वर्ष तक के बच्चों को “बाल संजीवनी” हलवा और 03 वर्ष से 06 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा एवं पौष्टिक दलिया उपलब्ध कराया जाएगा।

रेसिपी आधारित पोषण में भारत सरकार द्वारा निर्धारित कैलोरी, प्रोटीन और 11 अन्य आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स शामिल हैं। इसका उद्देश्य बच्चों और माताओं को संतुलित, स्वास्थ्यवर्धक और पोषणयुक्त आहार प्रदान करना है।

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वितरण और उत्पादन की प्रक्रिया

रेसिपी आधारित पुष्टाहार का उत्पादन उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) के माध्यम से किया जाएगा। जिन जिलों या परियोजनाओं में उत्पादन इकाइयां नहीं हैं, वहाँ नेशनल एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केट फेडरेशन (NAFED) के जरिए आंगनवाड़ी केंद्रों तक वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।

योजना को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने 301.19 करोड़ रुपये का वायबिलिटी गैप फंड (Viability Gap Fund – VGF) भी स्वीकृत किया है। इसका उद्देश्य उत्पादन इकाइयों को आर्थिक दबाव से बचाना और उन्हें गुणवत्तापूर्ण टेकहोम राशन (THR) तैयार करने के लिए वित्तीय सहयोग प्रदान करना है। इस फंड के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लाभार्थियों को निर्धारित पोषण मानकों के अनुरूप लगातार उच्च गुणवत्ता का आहार उपलब्ध हो।

योजना के लाभ

  1. समान और पारदर्शी वितरण: FRS प्रणाली के कारण सभी लाभार्थियों तक पोषण की सही मात्रा पहुंचेगी।
  2. संतुलित पोषण: बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए विशेष रूप से तैयार रेसिपी।
  3. अतिकुपोषण का मुकाबला: कमजोर और कुपोषित बच्चों के लिए पौष्टिक विशेष आहार।
  4. स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन: SRLM की इकाइयों के माध्यम से स्थानीय रोजगार और उत्पादक क्षमता में वृद्धि।
  5. आर्थिक स्थिरता: VGF के कारण उत्पादन इकाइयों को नुकसान से बचाया जाएगा और योजना की दीर्घकालीन सफलता सुनिश्चित होगी।

इस योजना से न केवल बच्चों और माताओं को बेहतर स्वास्थ्य मिलेगा, बल्कि यह प्रदेश में पोषण स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की रेसिपी आधारित और तकनीकी प्रणाली वाला मॉडल देशभर के लिए उदाहरण साबित हो सकता है।

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